Makka Ki Kheti Kaise Karen: मक्का की खेती कैसे करें

Makka Ki Kheti Kaise Karen: भारत में मक्का की खेती पूरे देश भर में किया जाता है और अभी के समय में सभी खेतों में मक्का की खेती की गई है। अगर हम मकई की खेती में ज्यादा फायदा प्राप्त करना चाहते हैं तो वैज्ञानिक विधि से बन से काफी अच्छा पैदावार होता है। क्योंकि अच्छा कुछ के लिए अच्छी मिट्टी का चुनाव होना जरूरी है तब जाकर अच्छे पैदावार होगा। आज क्या डिग्री में बताया जाए की मार्केट खेती कैसे की जाती है इसलिए आपसे पूरे अंत तक जरूर पढ़े।

यह मुख्य रूप से खरीफ सीजन की फसल है लेकिन इसे रबी में भी उगाया जाता है। मक्का की खेती भारत में मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात इत्यादि राज्य में की जाती है। मक्का की मांग साल भर बाजारों में बनी रहती है। इसीलिए पूरे देश भर में इसकी खेती की जाती है किसानों को इस खेती करने से काफी लाभ होता है। क्योंकि इसकी बहुत सारे ऐसे किस्में में है जो काफी महंगे बिकने हैं।

Makka Ki Kheti Kaise Karen

मक्का की खेती के लिए उचित जल निकासिक बालू मटियार से दोमट मिट्टी में हो सकती है। जिसमें वायु संचार एवं पानी के निकास की उत्तम व्यवस्था हो सके एवं इसका पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। तब जाकर मकई खेती अच्छी तरीका से होगी। और ज्यादा पैदावार होगा। जिस जमीन में नमकीन पानी की समस्या है। वहां मक्का की बजाई मेरे के ऊपर बजाए साइड में करें। जिससे जल नमक से प्रभावित न हो सके ऐसे में मक्का की खेती सालों भर की जाती है। मगर इसका मुख्य रूप से खरीफ फसल के साथ की जाती है।

Makka Ki Kheti Kaise Karen: मक्का की खेती कैसे करें
Makka Ki Kheti Kaise Karen

मक्का की खेती की तैयारी कैसे करें

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक किसान खेत की तैयारी जून के दूसरे सप्ताह में शुरू कर देनी चाहिए। खरीफ की फसल के लिए एक गहरी जुताई मीठी पलटने वाले हाल से करनी चाहिए। अगर खेत गर्मियों में खाली है तो जुटा गर्मियों में करना अधिक लाभदायक होता है। जैसे ही मानसून शुरू होता है आप मक्का की खेती शुरू कर सकते हैं। या थोड़ा सा रुक कर जुलाई महीने में इसकी खेती शुरू करेंगे तो और ज्यादा फायदेमंद साबित होगा। क्योंकि मानसून में ज्यादा बारिश होने के कारण बी का सरने का भी ज्यादा उम्मीद हो सकती है। इसलिए आप जब बरसात थोड़ा काम हो रहा है तुरंत आप खेती शुरू कर सकते हैं।

खेती की नमी को बनाए रखने के लिए कम से कम समय में जुताई करके तुरंत पता लगाना लाभदायक रहता है। उसके साथ आप गोबर वाला खाद पूरे खेत में फैला कर फिर से एक बार जुताई कर कर पाटा लगा सकते हैं। अगर किसान नवीनतम जुटा तकनीक जैसे शून्य जुताई का उपयोग न कर रहे हैं तो कल्टीवेटर एवं डिस्क हैरो से लगाकर चुदाई करके खेतों को अच्छी तरह से तैयार कर सकते हैं।

Makka Ki Kheti की बुवाई का समय

मक्का की खेती की बुवाई सालों भर कभी भी की जा सकती है मगर मुख्य रूप से खरीफ के फसल के साथ इसकी बुवाई होता है। लेकिन खरीफ ऋतु में बुवाई बारिश पर निर्भर करती अधिकतर राज्य में जहां पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो वहां पर खरीफ में बुवाई का उपयोग समय मध्य जून से मध्य जुलाई एवं अगस्त तक माना जाता है। और इस समय अधिकतर राज्य में मक्का की खेती की जाती है।

पहाड़ी एवं कम तापमान वाले क्षेत्रों में में के अंत से जून की शुरुआत में ही मक्का की बुवाई कर दी जाती है। सामान्य मक्का के लिए प्रति एकड़ 10 से 12 किलो ग्राम, क्वालिटी प्रोटीन मक्का के लिए 8 किलो, बेबी कार्न के लिए 10 से 12 किलो, स्वीट कार्न के लिए तीन से चार किलो एवं पॉपकॉर्न के लिए 6 से 7 किलो और चारे के लिए 25 से 30 किलो बीज की जरूरत होती है। बुवाई से पहले मिर्जा जनित रोग एवं कीट नाशक दवा का उपचार कर सकते हैं।

मक्का खेती के लिए जलवायु

मक्का एक ग्रीष्मकालीन फसल है सभी आप व्यवस्थाओं के तापमान लगभग 250 डिग्री सेंटीग्रेड के आसपास होना चाहिए। पकते समय गर्म तथा शुष्क वातावरण उपयुक्त होना काफी फायदेमंद साबित होता है। पाला फसल के लिए किसी भी अवस्था में हानिकारक होता है। इसीलिए ध्यान रहे की पाला से बचना होगा। असिंचित मक्के की खेती के लिए वार्षिक वर्षा 25 सेंटीमीटर से 30 सेंटीमीटर तक प्राप्त होता है।

विश्व एवं भारत में मक्का एक महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है। इसका उपयोग पशु चारे के रूप में सबसे ज्यादा किया जाता है। 26% मनुष्य आहार और जानवरों का आहार एवं 48% मुर्गी के आहार औद्योगिक उत्पादन एवं शेष स्टार्च एवं बी में लाया जाता है। इसके अलावा मक्का का फ्लेक्स तेल निकालने में स्टार्च के लिए पॉपकॉर्न बनाने आदि के रूप में किया जाता है।

खरपतवार प्रबंधन

जिस समय पर आप मक्का की खेती करते हैं। बाय करने के बाद आपको एनआइडीएआइ और बुराई भी समय-समय पर करना होगा। भूमि में वायु के अच्छे संचार से जड़ों को खाद्य पदार्थ एवं जल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो सके। इसके लिए आपको खरपतवार नाशक को खेतों से निकलना होगा। उसमें खरपतवार नाशक का छिड़काव भी करना पड़ सकता है।

इसके लिए मेजिन खरपतवार नाशक 500 ग्राम सक्रिय तत्व 1 से 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 800 से 900 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से खरपतवार नियंत्रण हो जाता है। एनआइडीएआइ दवाई का प्रयोग बुवाई के बाद अंकुरण से पूर्व करना चाहिए अर्थात बुवाई के 1 से 2 दिन के अंदर कर लेना काफी अच्छा माना जाता है। इसके पहचान 25 से 30 दिन फसल अवस्था पर हैंडल हो इस कतार बद कतार में एनआइडीएआइ करना चाहिए।

उर्वरक एवं खाद्य प्रबंधन

मक्के की अनुमानित उपज पाने के लिए 2 वर्ष टन प्रति हेक्टेयर गोबर की साड़ी खाद या कंपोज चाहिए। मिट्टी का परीक्षण कराकर उसमें उपलब्ध स्थिति तथा बोई जाने वाली किस में का प्रयोग करना चाहिए। अधिक उत्पादन के लिए निम्नलिखित उर्वरक और आवश्यकता अनुसार उर्वरक का उपयोग होना चाहिए। प्रति हेक्टेयर में पोटाश सिर्फ पकाने वाली पोटेशियम पकाने वाली 30 80 नाइट्रोजन मध्य पकाने वाली 40 100 नाइट्रोजन देरी से पकाने वाली 40 120 नाइट्रोजन का उपयोग होना चाहिए। फास्फोरस एवं पोटाश की संपूर्ण मात्रा में बुवाई कर देनी चाहिए। नाइट्रोजन की मात्रा तीन भागों में उर्वरक की पूरी मात्रा पौधों को प्राप्त होती है।

मक्के की किस्में का चयन

जितना अच्छा किस्म का मक्का का की बुवाई करेंगे उतने ही अच्छा आपको पैदावार देखने को मिलेगा। ग्रीष्मकालीन मक्का की खेती के लिए निम्न किस्म का अनुचित किया गया है विवेक मक्का हाईब्रिड – 27, गंगा -4, गंगा-11, डेक्कन-103, वी.एल.-42।

Makka की बुवाई की विधि

मक्का की बुवाई जुताई के तुरंत बाद बी खेतों में छीट देनी चाहिए। जिसके साथ उर्वरक के ऊंची मात्रा में उसका भी पूरे खेत में फैला देनी चाहिए। 5 से 7 इंच की दूरी पर आप बीजों का अंतर रख सकते हैं उसके बाद खेतों में पाटा लगा सकते हैं। चारे की बुवाई सिटी ड्रिल द्वारा करनी चाहिए मेरा पर बुवाई करते समय पीछे की ओर चलना चाहिए। ऐसे में मक्का का खेती कई प्रकार से की जाती है। कई जगहों पर छूटकर की जाती है तो कई जगह पर उंगली से डोब कर किया जाता है।

कब करें फसल की कटाई

मक्का की फसल की पूरी अवधि पूरा होने के बाद आप कटाई कर सकते हैं। ऐसे में 60 से 65 दिन बाद जाने वाली देसी किस्म बोने 75 से 85 दिन बाद या 90 दिन के बाद कटाई कर सकते हैं। अलग-अलग किस्म की मक्का अलग-अलग का समय लग जाता है। लगभग 25% तक नमी रहने पर ही फसल की कटाई कर लेनी चाहिए।

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