Sarso Ki Kheti Kaise Karen: सरसों की खेती कैसे करें

Sarso Ki Kheti Kaise Karen: भारत में सरसों की खेती पूरे देश भर में किया जाता है, क्योंकि एक महत्वपूर्ण खाद्य उपयोग का हिस्सा है। भारतीय रसोई में इसका पूरा उपयोग किया जाता है सरसों की खेती अच्छी जलवायु और मिट्टी में अच्छा व्रत के साथ हम खर्चे में हो जाता है। इसलिए सभी किसान भाई कम समय में इसकी खेती कर कर अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं। और इसकी फसल बर्बाद होने की भी संभावना बहुत काम रहता है। सबसे खास बात है कि जानवरों से इस फसल का नुकसान नौ के बराबर होता है। इसलिए किसानों को सबसे ज्यादा मुनाफा इस फसल में बहुत ही आसानी से हो जाता है। संपूर्ण जानकारी के लिए आप सभी इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े।

सरसों खेती की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि सिंचाई के साथ-साथ बीना सिंचाई के भी यह खेती की जा सकती है। जिससे किसानों को विभिन्न प्राकृतिक परिस्थितियों में उपज मिलती है। और काफी ज्यादा लाभ होता है यानी कम खर्चे में यह खेती अच्छे से हो जाती है। सरसों का तेल न केवल खाद्य के लिए उपयोग किया जाता है। बल्कि यह औषधि और उद्योगों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Sarso Ki Kheti Kaise Karen

भारत में सरसों की खेती के बाद सोयाबीन और मक्का विश्व में महत्वपूर्ण फैसले है। सरसों के पत्ते को सब्जियां के रूप में भी उपयोग किया जाता है। और आपको जानकारी के लिए बता दो कि सरसों की खाली दुधारू पशुओं के लिए एक महत्वपूर्ण चार स्रोत भी होता है। सरसों के तेल का उपयोग भारतीय व्यंजन को खाद्य वस्तु एवं मालिश और औषधि के लिए किया जाता है। किसानों को इस खेती करने से काफी अच्छा मुनाफा मिलता है। इसलिए सभी किसान बढ़-चढ़कर सरसों की खेती करते हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी कीमत अच्छा मिलता है। जो किसान को अच्छे भविष्य की ओर अग्रसर कर रहा है।

Sarso Ki Kheti Kaise Karen: सरसों की खेती कैसे करें
Sarso Ki Kheti Kaise Karen

Sarso Ki Kheti तैयार कैसे करें

सरसों की खेती तैयार करने के लिए सबसे पहले भुरभुरा मिट्टी की आवश्यकता होती है। सबसे पहले आपको दो या तीन बार जुताई अच्छे से देशी हल से कर लेनी चाहिए। उसके बाद खुला छोड़ दे जिससे सूर्य के प्रकाश उसमें जा सके फिर बोलने से पहले एक बार और जुताई कर दे। क्योंकि पूरी मिट्टी भुरभुरा हो जाना चाहिए। पाटा लगाने से सिंचाई करने में समय और पानी की बचत दोनों होगी, इसीलिए यह काम बोलने के बाद जरूर कर दें।

Sarso Ki Kheti के लिए जलवायु और मिट्टी

भारत में सरसों की खेती मुख्य रूप से रबी फसलों के समय बोई जाती है। इसकी बुवाई का समय मध्य सितंबर से मध्य अक्टूबर तक होता है। सरसों की खेती के लिए ठंडी और सुखी मौसम की आवश्यकता होती है। और इसमें ज्यादा सिंचाई करने की जरूरत नहीं है। एक बार आप सिंचाई कर देते हैं तब भी यह काफी अच्छा उपज दे देता है या बीना सिंचाई के भी आपको अच्छा परिवार मिल जाएगा।

उम्मीद की जाती है कि तापमान 15 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहना चाहिए, ठंड के समय यह खेती की जाती है। इतना तापमान आराम से मिल जाता है सरसों खेती के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी समतल और अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिए। बलुई मिट्टी सरसों के लिए अच्छी मानी जाती है लेकिन यह न सिर्फ लवानिया हो। बल्कि बंजर भूमि भी नहीं होनी चाहिए, तब जाकर सरसों की खेती काफी अच्छे से होती है।

बीज की मात्रा

सरसों की खेती करने जा रहे हैं तो जिन खेतों में सिंचाई करने के लिए प्राप्त साधन उपलब्ध है। वहां पर प्रति एकड़ 2 किलो सरसों का बीज का उपयोग कर सकते हैं। जबकि जिन खेतों में सिंचाई की साधन काम है वहां पर प्रति एकड़ 3 किलोग्राम सरसों के बीच का प्रयोग करना चाहिए। जिससे वहां पर अच्छे से सरसों निकाल सके बीच की मात्रा फसल की किस्म पर निर्भर करता है। जैसे यदि फसल की अवधि अधिक है तो बीच की मात्रा कम होनी चाहिए। यदि फसल की अवधि कम है तो बीच की मात्रा अधिक होनी चाहिए।

Sarso Ki Kheti के लिए सिंचाई

सरसों एक ऐसा फसल है जो जमीन से ही जल का उपयोग बहुत आसानी से कर लेता है। और उतना ज्यादा सिंचाई करने की भी जरूरत नहीं पड़ती है ऐसे में अगर सरसों की खेती करने से पहले वहां पर बारिश नहीं हुआ है। तो आपको सिंचाई करना काफी महत्वपूर्ण होगा जब आप सरसों की खेती करते हैं। बोयाई के 25 से 30 दिन बाद पहली सिंचाई कर देनी चाहिए। दूसरी सिंचाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

अगर जरूरत पड़े तो आपको 40 दिन के अंदर दूसरी सिंचाई भी कर लेनी चाहिए। ध्यान रहे की सिंचाई करते समय सरसों के फूल को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए, नहीं तो फसल में कमी आ सकता है। सिंचाई के लिए पट्टी विधि बेहतर है खेत की चौड़ाई के अनुसार 4 से 5 मीटर चौड़ी पट्टी बनाकर सिंचाई करना चाहिए जिससे पानी का वितरण समान रूप से हो सके।

सरसों की खेती के लिए खाद्य और उर्वरक

हर फसल को गाने के लिए खाद और उर्वरक की जरूरत पड़ती है और आज के समय में तो काफी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। खेतों में सिंचाई की उपयुक्त साधन उपलब्ध हो तो उसे खेत के लिए अच्छे से 10 तन सड़े हुए। गोबर की खाद 160 से 170 किलोग्राम यूरिया 250 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट 50 किलोग्राम न्यू रेट और पोटाश साथी 200 किलोग्राम जिप्सम बुवाई से पहले मिलना प्रयुक्त होता है।

सबसे ज्यादा यूरिया की अधिक मात्रा बुवाई के समय और बची हुई आधी मात्रा पहली सिंचाई के बाद खेत में मिला देनी चाहिए। इससे फसल में काफी ज्यादा वृद्धि देखने को मिलता है अगर आपके पास उपयुक्त साधन न हो तो 4 से 5 तन सड़े हुए गोबर की खाद और बाकी कम मात्रा में खाद्य का उपयोग करके कर सकते हैं। ऐसे में सरसों की खेती के लिए ज्यादा खाद की भी जरूरत नहीं पड़ती है मगर देने से आपके फसल में काफी वृद्धि होगा।

सरसों की कटाई और भंडारण

सरसों की फसल को जब 75% फलिया सुना हरे रंग की हो जाए तब उसकी कटाई कर देनी चाहिए। अगर ज्यादा देरी से कटाई करेंगे तो खेतों में ही शराब बीज झड़ जाएगा। इसीलिए समय रहते ही कटाई कर लेनी चाहिए फसल को मशीन से या हाथ से या काटकर सुखाकर या मड़ाई करके बीच को अलग कर लेना चाहिए। सरसों के बीज को अच्छी तरह से सूखने के बाद ही इसका भंडारण करना चाहिए नहीं तो बीज खराब हो सकता है।

सरसों की खेती से किसानों को कितना लाभ होगा

सरसों की खेती से किसानों को काफी ज्यादा लाभ प्राप्त होता है क्योंकि यह फसल काफी कम कीमत में ही उपजाऊ हो जाता है। और इसमें ज्यादा सिंचाई और मेहनत काफी कम लगता है जिसके बाद औसत किसानों को काफी ज्यादा लाभ पहुंच जाता है। लागत से कई गुना ज्यादा आपको फायदा हो सकता है।

सरसों का ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्म

सरसों की खेती कर रहे तो सबसे महत्वपूर्ण है कि अच्छे किस्म की बीच का उपयोग करना काफी महत्वपूर्ण साबित होता है। जरतार किस में उच्च उत्पादन अच्छी परिपक्व को रोक प्रतिरोधकता एवं अधिक तेल प्रतिशत प्रदान करती है। वैसे बीजों का उपयोग करना चाहिए जो वैज्ञानिक कारनो से भी महत्वपूर्ण होना चाहिए। जो निम्न प्रकार के हैं-

  • PIONEER 45S46 MUSTARD SEEDS
  • Pioneer 45s47 Mustard Seed
  • Advanta 414 Mustard Seed
  • Shriram 1666 HYB Mustard Seed
  • Crystal Hybrid Mustard Seeds 5222.

सरसों के खेत से खरपतवार का नियंत्रण

सरसों खेती करने के बाद 15 से 20 दिन के तुरंत बाद खेत से घने पौधे को निकाल देनी चाहिए। खरपतवार को खत्म करने के लिए सिंचाई से पहले खेत की नीड़ाई और गुराई करना आवश्यक है। खरपतवार खत्म न होने की स्थिति में दूसरी सिंचाई के बाद घर पर द्वारा नियंत्रण के लिए छिड़काव की जरूरत पड़ सकती है। पेडिमेथालिन 25 इसी रसायन की 3.3 लीटर मात्रा को 6 से 8 से लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।

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