Gehu Ki Kheti Kaise Karen: गेहूं एक महत्वपूर्ण फसल है जो जीवन का जीने के लिए बहुत जरूरी है। और यह भारत में पर्याप्त मात्रा में उगाई जाती है, जिसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजधानी, बिहार, गुजरात एवं महाराष्ट्र प्रमुख राज्यों में आता है, जहां पर पर्याप्त मात्रा में गेहूं की खेती की जाती है। खाद्य पदार्थ में सबसे प्रमुख फसल के रूप में जाना जाता है। इस मुख्य रूप से चिकनी दोमट मिट्टी में उगाई जाती है, जिसमें उचित वायु संचार की आवश्यकता होती है। यह एक सूखी फसल है।
बता दे कि गेहूं की खेती के लिए ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है। बोने के बाद आप दो बार सिंचाई कर देते हैं तो यह पूरी तरह से पैक कर तैयार हो जाएगा। गेहूं की खेती की बहुत सारे अलग-अलग किस में होती है। जिसमें सर्वाधिक प्रसिद्ध DBW 222, DBW 252, DDW47, DBW 187, DBW 173, HD 2851, HD 2932, PBW 1 Zn, उन्नत PBW 343, PDW 233, WHD 943, TL 2908 आदि हैं। किस्म DBW 222 पंजाब, हरियाणा दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए आदर्श किस्म है।
Gehu Ki Kheti Kaise Karen
गेहूं की बुवाई के लिए बीजों को अधिक भिगोने की आवश्यकता नहीं होती है। बीजों को भिगोने के लिए 8 से 10 घंटे पर्याप्त रहते हैं आप चाहे तो बिना भिगोए ही बी बोल सकते हैं। बीजों को अधिक लंबे समय तक भिगोने से कटक संक्रामक बढ़ जाता है जिससे बी कर जाते हैं और खेती के लिए उपयुक्त नहीं जा सकता है।
इसलिए आप कच्चा बीज का उपयोग अच्छे से कर सकते हैं। और जब चाहे जिस भी खेत में बोल सकते हैं। ध्यान रहे कि बोलने से पहले खेत को उर्वरक युक्त बनाना होगा जिसमें खादर गोबर प्रमुख खाद या डालना होगा। जिस खेत उपजाऊ हो सके उसके बाद ही आप गेहूं की खेती करें तब जाकर अच्छा पैदावार हो सकता है।

गेहूं की खेती के लिए भूमि की तैयारी
गेहूं की खेती के लिए भूमि की तैयारी करना बहुत ही जरूरी होता है। सबसे पहले आपको दो बार जुताई करना होगा फिर से तीन बार कल्टीवेटर से जुताई करके भूमि को अच्छी तरह से तैयार कर ले। उसके बाद गोबर की खाद को पूरे खेत में फैला दे एवं अंतिम बार जुताई करें। खाद 12 टन के, उर्वरक 5 किलो ट्राइकोडर्मा 5 किलो एवं एक्मोनास डोमिनोज 5 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग होना चाहिए। तब जाकर खेत काफी उपजाऊ होगा और यहां पर गेहूं का पैदावार सबसे अच्छा होगा।
Gehu Ki Kheti के लिए उपयुक्त मिट्टी
गेहूं की खेती की अच्छी संरचना एवं मध्य जल धारण क्षमता वाली चिकनी दोमट मिट्टी उपयुक्त माना जाता है। अत्यधिक उपजाऊ और अधिक जल निकास वाली मिट्टी का उपयोग करने से बचना बेहतर होता है। क्योंकि गेहूं एक सूखे उपजाऊ वाला फसल है। गेहूं की खेती के लिए पीएच मान 6 से 7 होता है उपयुक्त माना जाता है। और इस पीएच मान वाली मिट्टी पर फसल की वृद्धि और ऊपर काफी अच्छा होता है।
गेहूं का बीज का उपचार
गेहूं के बीज का उपचार विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है, जिसमें जलवायु बुवाई का स्थान एवं मिट्टी की दशा पर निर्भर करता है। कुछ सामान्य बीज उपचार है जिसमें बीजों को कीटनाशक एवं फफूंद नाशक या कीटाणु बिना उपचारित किया जा सकता है। नमी की अधिक वाले स्थान पर अनेक रोग जैसे स्मट, राट, झुलसा बी को प्रभावित करते हैं जिसके लिए आप कीटनाशक का छिड़काव कर सकते हैं। जिसमें टेबुकोनाजोल 1 ग्राम प्रति किलो बीज या बेपिस्टिन 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीच की ऊंचाई कर सकते हैं।
गेहूं की खेती की बुवाई का समय
गेहूं खेती की बुवाई का समय अलग-अलग जलवायु पर अलग-अलग हो सकता है। अगर आप सिंचित समय से बुवाई करते हैं तो 25 अक्टूबर से 25 नवंबर के बीच कर सकते हैं। वहीं अगर आप थोड़ी देरी से करना चाहते हैं तो 25 नवंबर से 25 दिसंबर सबसे अच्छा समय माना जाता है। और इस समय खेत काफी उपजाऊ भी हो जाती है। क्योंकि उससे पहले धान की खेती हुई होती है तो उसमें धूप लगने का प्रॉपर समय भी मिल जाता है। इसलिए आप नवंबर के अंत और दिसंबर के शुरू में गेहूं की खेती करते हैं तो सबसे अच्छा माना जाता है।
कटाई और भंडारण का सही तरीका
जब गेहूं के दाने पैक कर सख्त और तैयार हो जाए तो नमी की मात्रा 20% से कम हो जाए तो कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई मढाई और ओसाई एक साथ की जा सकती है। आधुनिक मशीन का उपयोग करके बहुत आसानी से कटाई की जा सकती है। और सभी काम एक साथ पूरा हो जाएगा नवीनतम प्रजातियों के प्रयोग से लगभग प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त की जा सकती है।
अगर आप गेहूं के भंडारण करना चाहते हैं तो भंडारण से पहले दोनों को अच्छी तरह से सुख ले ताकि औसत नामी 10 से 12% के सुरक्षित स्तर पर आ जाए। टूटे और कटे फटे दोनों को अलग कर देनी चाहिए मध्य कीटों को नुकसान से बचा जा सकता है। अनाज भंडारण के लिए की सीट के बने बीस का प्रयोग करना चाहिए तथा किलो से बचाव के लगभग 10 कुतल अनाज में एक टिकिया अल्मुनियम फास्फाइड भी रख दें जिससे कोई भी कीटाणु गेहूं में नहीं लगेगा।
गेहूं की खेती के लिए बीज का चुनाव
गेहूं की खेती के लिए बीच का चुनाव करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। मशीन से बुवाई करने पर एक हेक्टेयर के लिए 100 किलोग्राम तथा मोटे बीच के लिए 125 किलोग्राम की मात्रा में बीच का प्रयोग करना चाहिए। अगर खेत में बीच की अनुकूलन क्षमता कम है। तो सामान्य बी के लिए 130 किलोग्राम और मोटे बीच के लिए 150 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की मात्रा से उपयोग करना चाहिए जिससे पूरे खेत में बीजों का पूरा उपयोग हो सके।
गेहूं की खेती के लिए सिंचाई प्रबंधन
धान की खेती की तरह गेहूं की खेती के लिए हमेशा खेत में जल की जरूरत नहीं पड़ती है। अधिक उपज के लिए गेहूं की फसल को 3-4 सिंचाई की जरूरत होती है। पानी की उपलब्धता मिट्टी के प्रकार और पौधों की आवश्यकता के हिसाब से सिंचाई करना जरूरी होता है। गेहूं के फसल जीवन चक्र में तीन अवस्था जैसी चंदेरी जल निकालना यह किस दिन बाद सिंचाई कर देनी चाहिए। उसके बाद 50 दिन के बाद आपको फिर दोबारा सिंचाई करने की आवश्यकता हो सकता है।
उसके बाद एक बार और थोड़ा सा पानी का छिड़काव कर सकते हैं ।जिससे आप गेहूं की वृद्धि काफी तेजी के साथ आगे बढ़ेगा इससे ज्यादा सिंचाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगा। क्योंकि पौधा काफी बड़ा हो जाएगा और उसे समय सिंचाई करेंगे तो पौधे का खराब होने का दर ज्यादा हो जाएगा। क्योंकि जब आप गेहूं की खेती की सिंचाई करते हैं तो पूरे खेत में आपको जाकर सिंचाई करना पड़ता है। इसलिए इतना सिंचाई कर देते हैं तो आपके पौधा काफी अच्छा हरियाली के साथ आगे बढ़ेगा और गेहूं पककर तैयार हो जाएगा।
रोग और कीट प्रबंधन
गेहूं की खेती जब आप करते हैं तो जैसे-जैसे पौधा बढ़ेगा उसके साथ खरपतवार्नशी एवं कीटाणु भी साथ में बढ़ेगा। इसके लिए समय-समय पर आपको कीटनाशक दवा का छिड़काव करना होगा। बाजारों में अलग-अलग कीटनाशक दवा उपलब्ध हो चुका है जिसका उपयोग करके आप कीटनाशक दवा का छिड़काव कर सकते हैं।
बीज जनित संक्रमण के प्रबंधन के लिए प्रमाणित बीच का प्रयोग करें बीजों को कार्बाॅक्सीमी या कार्बोरेटर जिम से 2.5 ग्राम प्रति किलो की दर से उपचारित करें। जिससे बीच पर कीटाणु लगने की उम्मीद बहुत कम होता है। चुरनील आशिता रोग के लक्षण दिखाई दे। तो उसके नियंत्रण के लिए प्रॉपर्टी को नाजोल नामक दवा की उपयोग 0.1% की मात्रा का एक छिड़काव पौधे की बाली निकलते समय बीमारी से प्रभावित क्षेत्र में करना चाहिए।

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