Dhaniya Ki Kheti Kaise Karen: धनिया की खेती कैसे करें

Dhaniya Ki Kheti Kaise Karen: भारत देश मसाले की भूमि के नाम से प्राचीन काल से ही जाना जा रहा है। विश्व में प्रसिद्ध धनिया की खेती आज भी किसान भाई लोग काफी ज्यादा मात्रा में करते हैं। क्योंकि मसाले में धनिया का स्वाद काफी महत्वपूर्ण होता है इसके बीच एवं पटिया भोजन को स्वादिष्ट करता है। इसलिए सभी लोग सब्जी में इसका उपयोग काफी दिलचस्पी के साथ करते हैं मध्य प्रदेश में धनिया खेती सबसे ज्यादा होती है।

धनिया एक बहुमूल्य मसाले की आर्थिक दृष्टि से लाभकारी फसल है। धनिया के बीच एवं पत्तियां भोजन को संबंधित और स्वादिष्ट बनाने का काम करती है। इसलिए सभी का सब्जियों में धनिया का उपयोग होता है। और उसकी हरी पट्टी का भी उपयोग काफी ज्यादा किया जाता है। भारत धनिया का प्रमुख निर्यातक देश से धनिया के निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित की जाती है।

Dhaniya Ki Kheti Kaise Karen

धनिया की खेती करने से किसान भाई को काफी फायदा होता है सबसे पहले तो हरी पत्ता धनिया का बिक जाता है। बाजारों में क्योंकि इसका उपयोग सब्जियों से लेकर सलादो तक की जाती है जिसे स्वादिष्ट हो जाता है‌। उसके बाद इसका जब भी तैयार होता है तभी किसानों को काफी मुनाफा होता है। इसलिए भारत के किसान धनिया खेती बढ़ चढ़कर करते हैं और इससे काफी ज्यादा मुनाफा कमाते हैं‌।

अच्छी उपज के लिए अच्छी भूमि की जरूरत पड़ेगी इसका बहुत सारे अलग-अलग किस्म है जिसके बारे में बताया जाएगा। धनिया की खेती जाने के दिन में की जाती है ऐसे में तो बारहमासी इसकी खेती होती है। मगर मुख्य रूप से नवंबर के महीना में इसकी खेती सबसे ज्यादा की जाती है।

Dhaniya Ki Kheti Kaise Karen: धनिया की खेती कैसे करें
Dhaniya Ki Kheti Kaise Karen

धनिया की खेती के लिए जलवायु

स्विफ्ट और ठंडा मौसम अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए अनुकूल होता है। बीजों के अनुकूलन के लिए 25 से 30 सेंटीग्रेड तापमान अच्छा माना जाता है। धनिया शीतोष्ण जलवायु की फसल होने का फूल और दान बनने की अवस्था पर पाला रहित मौसम की आवश्यकता होती है। धनिया के बीज की उच्च गुणवत्ता और अधिक तेल के लिए ठंडी जलवायु की जरूरत होती है। जिसमें कम धूप और समय-समय पर सिंचाई की जरूरत पड़ती है।

धनिया खेती के लिए भूमि का चुनाव

धनिया की खेती के लिए दोमट भूमि का चुनाव सबसे उपयुक्त माना जाता है। अगर आप धनिया खेती कर रहे हैं तो सिंचाई की व्यवस्था होनी चाहिए। जहां पर जल निकासी हो सके धनिया चरिया एवं लवणीय भूमि को सहन नहीं करती है। अच्छे जल निकास एवं उर्वरक शक्ति वाली दोमट भूमि युक्त होनी चाहिए।

जहां की मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 होनी चाहिए। सिंचाई वाले क्षेत्र को अच्छी तरह से जुताई कर ले प्राप्त जल ना हो तब भूमि तैयारी पलेवा देकर करनी चाहिए। जिस जमीन की जुताई के समय ढेले भी नहीं होने चाहिए एवं खेतों की खरपतवार को अच्छी तरह से निराई कर ले। उसके बाद धनिया की खेती करनी चाहिए।

धनिया के उन्नत किस्म

  • आरसीआर 436
  • आरसीआर435
  • आर सी आर41
  • कुंभराज
  • हिसार सुगंध

धनिया बोने का सही समय

धनिया की फसल रबी मौसम में बोई जाती है। धनिया बनेगा सबसे उपयुक्त समय 15 अक्टूबर से 15 नवंबर अच्छा माना जाता है। इस समय अगर आप धनिया की खेती करते हैं तो काफी लाभदायक होगा और किसानों को काफी फायदा होगा। क्योंकि इस समय पैदावार काफी ज्यादा होता है। हरे पत्तों की फसल के लिए अक्टूबर से दिसंबर का समय बोया जाए तो उपयुक्त माना जाता है। पहले से बचाव के लिए धनिया को नवंबर के द्वितीय सप्ताह में बोना प्रयुक्त होता है। धनिया की खेती 120 दिनों में तैयार हो जाता है।

धनिया की खेती करने का तरीका

  • धनिया खेती करने का सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से गहरी जुताई कर देनी चाहिए। खेत में प्रति एकड़ 5 से 6 गाड़ी सारी हुई गोबर की खाद का उपयोग करना चाहिए।
  • यदि आप हरी धनिया बीज बनाना चाहते हैं तो उसे हिसाब से धनिया की बुवाई करना चाहिए।
  • गर्मियों में धनिया की बुवाई करना चाहते हैं तो सबसे पहले जमीन पर हल्की सिंचाई करें जिससे बीज अंकुरण का एक समय सीमा में तैयार हो सके।
  • मिट्टी में नमी आने के बाद बुवाई करना शुरू कर सकते हैं।
    अंकुरण होने के बाद पानी का छिड़काव और खाद दे सकते हैं।
  • गोबर के खाद का उपयोग करने के बाद फिर से एक बार अच्छी तरह से जुताई कर देनी चाहिए की खेत भुरभुरा हो जाए।

बुवाई की विधि

धनिया की बुवाई मशीन एवं हाथों दोनों माध्यम से की जा सकती है। जमीन पर फैलाकर रोटावेटर से मिक्स कर देना चाहिए। जिससे काफी आसानी से आप इसकी बुवाई कर सकते हैं।

धनिया के फसल की अवधि

हरि पति आने की अवधि 45 से 50 दिनों में पहली कटाई हो सकती है।‌ बीज तैयार होने की अवधि 110 से 20 दिनों में तैयार हो जाता है। उसके बाद आप धनिया की कटाई कर सकते हैं।

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