Dhan Ki Kheti Kaise Karen: धान की खेती कैसे करें

Dhan Ki Kheti Kaise Karen: धान की खेती पूरे देश भर में की जाती है क्योंकि 100% लो इस फसल का उपयोग करते हैं। चावल हमारे देश के सबसे प्रमुख खाद्य पदार्थ है। हर किसी को हर रोज इसकी जरूरत पड़ती है इसलिए यह पूरे देश भर में इसकी खेती की जाती है। भारत में सबसे ज्यादा चावल की खेती पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र जैसे राज्य में किया जाता है। इस आर्टिकल में आपको बताया जाएगा कि धान की खेती कैसे की जाती है। कब इसकी बुवाई किया जाता है एवं इसकी कटाई कब की जाती है।

बता दे की सबसे पहले अच्छी उपज के लिए अच्छे बीच का होना जरूरी है। अच्छे बीज के लिए देसी हाइब्रिड रिसर्च भी जिस तरह के आपको आसानी से मिल जाए उसका चयन करें। तब जाकर आप धान की अच्छा उपज प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ जलवायु मिट्टी पानी यह सब का भी ध्यान रखना आपके लिए महत्वपूर्ण प्राथमिकता होती है। क्योंकि धन की खेती में हमेशा पानी होना चाहिए यानी सिंचाई बुवाई से लेकर कटाई तक होनी चाहिए।

Dhan Ki Kheti Kaise Karen

धान की खेती आज के समय में ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहरी क्षेत्र हर जगह किया जाता है। फसल में सबसे प्रमुख फसल है अधिक उपज के लिए हाइब्रिड बीज का उपयोग किया जाता है। क्योंकि ज्यादा उपज हो इसके लिए रिसर्च एवं विज्ञान विधि द्वारा खेती करके ज्यादा से ज्यादा पैदावार पैदा करने की कोशिश की जाती है। इसके बहुत सारे प्रजातियां होती है जिसमें प्रमुख बासमती, सोना मंसूरी, पटेल चावल, मध्यान मोटा चावल इत्यादि होता है। धान की खेती का नाम बहुत ही आसान है क्योंकि यह हर जगह किया जाता है। और बहुत आसानी से कोई भी इसकी खेती करना शुरू कर सकते हैं।

Dhan Ki Kheti Kaise Karen: धान की खेती कैसे करें
Dhan Ki Kheti Kaise Karen

Dhan Ki Kheti के लिए जलवायु

धान की खेती के लिए महत्वपूर्ण है जलवायु औसत तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए। धान की सामान्य विधि और विकास के लिए दिन का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस एवं रात का तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच सबसे उपयुक्त माना जाता है। अगर धान की अच्छी पैदावार चाहते हैं तो दोमट, हल्की दोमट मटियार मिट्टी में अच्छी उपज होती है। ऐसे क्षेत्र जहां 2 से 4 इंच तक पानी जमा रहता है वहां सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है। क्योंकि धन की खेती के लिए हमेशा सिंचाई की जरूरत होती है। इसलिए इसकी खेती आप इन परिस्थितियों में कर सकते हैं।

धान की खेती के लिए सिंचाई

धान की खेती बरसात के दिनों में होती है उसे समय सिंचाई करने के लिए कहीं दूसरी जगह से पानी लाने की आवश्यकता नहीं होता है। मगर बरसात न होने या गर्मी के मौसम में धान की खेती के लिए 7 से 8 सिंचाई की आवश्यकता होती है। क्योंकि धन की खेती में हमेशा पानी की आवश्यकता है।

Dhan Ki Kheti की तैयारी कैसे करें

धान की खेती की तैयारी धान रोपाई से पहले करनी चाहिए जिस खेत में धान रूपा जाने वाला है। उसे खेत में एक महीने पहले देचा या हरी खाद के लिए लोबिया की बुवाई करने से हरी खाल तैयार हो जाता है। 15=20 पहले देचा लोबिया की खेती में रोटा वेटर या डिस्क हैरो से जुटाए करके कर 4=5 इंच तक 7=8 इंच तक पानी खड़ा रखे। जिससे अच्छे से हरी खाद डी कंपोज हो जाए इस तरह से धन की रोपाई से पहले अच्छे से जुटाए भी करना पड़ेगा। जिससे खरपतवार नाश हो सके और जब रूपा जाए तो कोई रुकावट भी ना हो।

धान की रोपाई

धान की रोपाई से पहले एक अलग खेत में धान की भी आप बोया जाता है। उसके बाद धान की बी को एक-एक करके उखाड़ कर उसे जिस खेत में रूपा जाएगा उसे खेत में जुटा के बाद भरपूर मात्रा में पानी होनी चाहिए। उसके बाद आप उसे खेत में धान की रोपाई कर सकते हैं जिसमें हर तरह की खाद का उपयोग किया गया हो। जिससे पौधे को तुरंत वृद्धि होने में कोई रुकावट ना हो सके।

समय-समय पर उसे खेत में खरपतवार नाश को अलग करना होगा। रोपाई के बाद दिमाग और सफेद गीडार पौधे की जड़ काली होकर जड़ सड़ने जैसी रोग बीमारी से बचाया जा सकता है। इसके लिए आपको कीटनाशक का छिड़काव भी करना पड़ेगा जिससे खरपतवारों को उगने से रोका जा सके ध्यान में भी जरूरी पोषक तत्व के लिए उर्वरक देना होता है। ध्यान में फास्फेट नाइट्रोजन और पोटाश की पूर्ति धान रोपाई के समय से 10 दिन के अंदर जरूर कर दें।

नील हरित शैवाल

धान में नील हरित शैवाल के प्रयोग से करीब प्रति वर्ष हेक्टेयर 20 से 30 किलोग्राम नाइट्रोजन मृदा में स्थापित होती है। जिसका उपयोग ज्ञान की फसल के द्वारा होता है। ध्यान रहे की धान के खेत में पानी सूखने ना पाए धान की फसल में इसके साथ 80 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर देने पर अच्छी उपज होती है 10 से 15 किलोग्राम टीका रोपण के एक सप्ताह बाद खारे पानी में प्रति हेक्टेयर की दर से बिखर दे। सवाल का प्रयोग कम से कम 3 साल तक लगातार करें इससे खेत में काफी अच्छा उपज देखने को मिलेगा।

धान की खेती करने का सही समय

धान की रोपाई का सही समय जून के तिरछे सप्ताह से लेकर जुलाई के तीसरे सप्ताह तक अच्छा माना जाता है। इससे पहले मई में इसकी पौधे तैयार करने का काम भी शुरू हो जाना चाहिए मई में इसकी नर्सरी तैयार कर लेनी चाहिए जून में इसकी रोपाई का काम शुरू किया जाना चाहिए। जब भारत में मानसून आ रहा है उसके तुरंत बाद धान की रोपाई शुरू हो जाए तो काफी अच्छा माना जाता है। किसान भाई धान की नर्सरी इस तरह से लगा सकते हैं।

धान की किस्म के आधार पर इसकी नर्सरी तैयार करने का समय अलग-अलग हो सकता है। अगर आप ध्यान की हाइब्रिड किस्म के लिए धन की नर्सरी मई के दूसरे सप्ताह में लगा सकते हैं। जो जून के दूसरे सप्ताह तक तैयार हो जाएगा। अगर आप बासमती किस्म की नर्सरी तैयार करना चाहते हैं तो जून के पहले सप्ताह में लगाई जाती है।

धान की बुवाई की एस आर आइ विधि

यह धन बुवाई की आधुनिक की विधि माना जाता है। इस विधि से सबसे पहले 20% वर्मी कंपोस्ट 70% मिट्टी और 10% भूसी या रेट लेकर मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद प्लास्टिक की पॉलिथीन बेचकर तैयार किए गए मिश्रण से उठी हुई क्यारियों तैयार की जाती है। यदि नवमी का भाव हो तो इसमें पानी दिया जाता है और इस विधि से 10 से 12 दिनों में पौधे रोपे के लिए तैयार हो जाता है। जब पौधे के दो पति आ जाए तब इसकी रोपाई किया जा सकता है। इस विधि से बहुत जल्द आप धान की रोपाई कर सकते हैं।

धान में लगने वाले रोग

  • ब्लास्ट
  • ब्राउन स्पॉट
  • बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट
  • राइस टंगरो
  • शीथ रोट
  • शीथ स्माट
  • बैक्टीरिया लिप स्ट्रोक
  • बकाने
  • राइस ग्रोसरी स्टंट

धान की कटाई कब की जाती है

धान की कटाई अक्टूबर से नवंबर महीने में कर ली जाती है।‌ क्योंकि इस समय तक उत्तर भारत में धान पूरी तरह से पक जाता है। कटाई हो जाने के बाद इसे पीट कर धन को पौधे से अलग किया जाता है।‌आज के समय में आधुनिक मशीन का उपयोग किया जा रहा है जो बहुत आसानी से पौधे से धान के बीज अलग की जा रही है। उसके बाद मशीन के माध्यम से ही बीच के ऊपर की पइया को निकाल दी जाती है। इसके बाद चावल के रूप में देखने को मिलता है।

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