Carrot Farming: गाजर की खेती कैसे करें

Carrot Farming: गाजर की खेती पूरे भारत भर में की जाती है जो की अलग-अलग रंगों के गाजर उगाई जाती है। जिसमें सबसे ज्यादा पसंद लाल रंग वाले गाजर को लोग पसंद करते हैं। कहां जाए तो तीन रंगों के गाजर उगाई जाती है जिसमें लाल, काली और नारंगी अच्छे गुण वाले मोती लंबी लाल या नारंगी रंग की जरूरत वाली गाजर अच्छी मानी जाती है।

सबसे ज्यादा गंज ठंड के मौसम के दिन में देखने को मिलता है जिसमें विटामिन की भरपूर मात्रा होती है। गाजर के जड़ों में अल्फा और बिटा केरोटिन का प्रमाण अधिक होता है आप इसे कक्षा या पका कर दोनों तरीके से खा सकते हैं। सबसे ज्यादा यह सलाद और हवा के लिए प्रसिद्ध है क्योंकि गाजर खाने से शरीर काफी स्वस्थ रहता है। पाचन क्रिया अच्छी रहती है सही कम्युनिटी सिस्टम मजबूत होता है इसलिए हर किसी को नियमित रूप से गाजर खाना चाहिए।

Carrot Farming

गाजर की खेती करना चाहते हैं तो बहुत ही अच्छा पैदावार होता है। आप किसी भी मिट्टी में गाजर की खेती कर सकते हैं। अगर अच्छा ऊपर चाहते हैं तो अच्छी मिट्टी का चुनाव करना होगा। जो काली दोमट मिट्टी होनी चाहिए जहां पर अच्छा से गाजर का उत्पादन हो सकता है। गाजर को तैयार होने में 80 से 90 दिन का समय लगता है।

गाजर की खेती में सिंचाई का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए समय-समय पर आपको सिंचाई भी करनी होगी प्रति हेक्टेयर 150 क्विंटल तक का पैदावार हो सकता है। अगर आप अच्छे किस्म का गाजर के बीज बोते है तो। गाजर की खेती अक्टूबर नवंबर तक कर लेनी चाहिए इस समय पर तैयार हो जाए। और बाजारों में बिकना शुरू हो जाए ऐसे में गाजर की खेती कई जगहों पर सालों भर की जाती है।

Carrot Farming: गाजर की खेती कैसे करें
Carrot Farming

गाजर की उन्नत किस्में

चैंटनी:- यह गाजर यूरोपीय किस्म है जो की काफी मोटा और गहरी लाल नारंगी रंग की होती है। इसे तैयार होने में 80 से 90 दिन का समय लगता है। मैदानी क्षेत्रों में तैयार करते हैं तो प्रति हेक्टेयर 150 क्विंटल तक पैदावार हो सकता है।

नैनटिस:- यह गाजर अच्छी किसी का होता है जो नारंगी और बेलन का आकार की गाजर तैयार होता है। जिसका अगला सिर छोटा पतला होता है एक अच्छी गांड वाली दानेदार मुलायम और मीठी कृष्ण की होती है। इस गाजर को तैयार होने में 110 से 120 दिन का समय लगता है। मगर इसका पैदावार काफी अच्छा होता है। प्रति हेक्टेयर 200 क्विंटल तक पैदावार देती है।

पूसा रुधिर:- उषा रुधिर गाजर लंबी और लाल रंग की होती है। इस गाजर को तैयार होने में करीब 120 दिन का समय लगता है। इसकी उपज काफी जबरदस्त होती है प्रति हेक्टेयर 280 से 300 क्विंटल तक होती है।

गाजर की खेत कैसे तैयार करें

अच्छी उपज और जड़ों की गुणवत्ता के लिए गाजर की खेती करने से पहले दो से तीन बार जोताई जरूर कर ले। उसके बाद गोबर का खाद डालकर एक बार जुटा करके मिट्टी को भुरभुरा कर लो और समतल बना दे कि जब सिंचाई करें तो पानी खेतों में ठहरे ना।

गाजर की खेती की सिंचाई

गाजर के फसल की बुवाई के बाद सिंचाई करना काफी आवश्यक है। बोने के तुरंत बाद गाजर की सिंचाई कर देनी चाहिए। अगर नवमी की कमी है तो फसल तैयार होने के लिए करीब चार से पांच बार सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। आवश्यकता अनुसार 15 से 20 दिनों के अंदर सिंचाई करनी चाहिए।

गाजर की खेती में ध्यान रखने वाली बातें

  • गाजर की बुवाई अगस्त से सितंबर तक कर लेनी चाहिए वही यूरोपियन किस्म की बुवाई कर रहे हैं तो अक्टूबर तक कर ले।
  • गाजर की खेती करने वाले किसान को एशियाई किस्म की बुवाई करनी चाहिए।
  • गैलरी खेती के लिए 12 से 20 डिग्री का तापमान अच्छा रहता है।
  • गाजर की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर 10 से 12 किलोग्राम बीच की आवश्यकता होगा।
  • गाजर की खेती दोमट मिट्टी में करनी चाहिए सबसे अच्छा उपज होता है।
  • भारी भूमियों में या जहां नीचे की भूमि सख्त होती है ऐसे खेतों में गाजर की खेती करनी चाहिए।
  • अच्छी पैदावार और जड़ों की गुणवत्ता के लिए बजाई हल्की डोलियों पर करनी चाहिए।
  • अत्यधिक पानी देने से गाजर के लिए से बनने लग जाते हैं इसीलिए पानी हिसाब से दे।
  • गाजर की आवश्यकता अनुसार सिंचाई करनी चाहिए।
  • प्यार होते हैं गाजर के खुदाई शुरू कर देनी चाहिए।

गाजर का बुवाई का तरीका

अच्छी पैदावार और जड़ों की गुणवत्ता के लिए गाजर की खेती डोलियों के बीच 30 से 45 सेंटीमीटर की दूरी तथा पौधों से पौधों की दूरी 6 से 8 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। डोलियों की चोटी पर 2 से 3 सेंटीमीटर गहरी नाली बनाकर बीज बोना चाहिए।

गाजर की खेती के लिए खाद और उर्वरक

खेत की तैयारी के समय 20 से 25 टन गोबर की साड़ी खाद प्रति हेक्टेयर जुताई करते समय डालना चाहिए। इसके अलावा 20 किलोग्राम शुद्ध नाइट्रोजन, 20 किलोग्राम फास्फोरस, 20 किलोग्राम पोटाश की मात्रा बोते समय प्रति हेक्टेयर के खेत में डाल देनी चाहिए। इससे खेत का भी उपजाऊ हो जाता है 20 किलोग्राम नाइट्रोजन लगभग 2 से 4 सप्ताह बाद खरीफ फसल में लगाकर मिट्टी चढ़ाते समय देनी चाहिए इससे अच्छा पैदावार होता है।

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