Karela Ki Kheti Kaise Karen: करेला की खेती कैसे करें

Karela Ki Kheti Kaise Karen: भारतीय से देश में कार्यालय खेती काफी लंबे समय पहले से होती आ रही है। यह सब्जियों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सबसे खास बात है कि अगर आपको पौष्टिक और औषधि गुन वाला सब्जी खाना है तो करेला आपके लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। क्योंकि आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के अनुसार मधुमेह रोगियों के लिए करेले की सब्जी का सेवन काफी लाभदायक रहता है।

हमेशा डॉक्टर सलाह देते हैं कि करेले की सब्जी सप्ताह में एक बार जरूर खाना चाहिए जिसे सेहत काफी स्वस्थ रहता है। अगर आप बिन मौसम को भी इस सब्जी का उपयोग करना चाहते हैं। तो सबसे पहले छोटे-छोटे टुकड़ों करके धूप में सुखाकर रखने और इसे आप कभी भी बना कर खा सकते हैं करेले की सबसे ज्यादा लोकप्रिय भरवा की सब्जी है।

Karela Ki Kheti Kaise Karen

करेला खाने में थोड़ा कड़वा लगता है मगर शरीर के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। इसलिए आप इस सब्जी का उपयोग अच्छे से कर सकते हैं। जो आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखता है। इसीलिए हर लोग करेला के सब्जी खाते हैं पूरे भारत में करेला की खेती होती है। मुख्य रूप से उत्तर और मध्य भारत में इसकी खेती सबसे ज्यादा की जाती है। किसानों को खेती करने से काफी लाभ भी मिलता है क्योंकि हर कोई करेला खाना पसंद करता है।

Karela Ki Kheti Kaise Karen: करेला की खेती कैसे करें
Karela Ki Kheti Kaise Karen

हिसार सिलेक्शन

हिसार नाम से ही आपको पता चल जाना चाहिए कि पंजाब और हरियाणा के सबसे लोकप्रिय किस्म है। जो यहां की जलवायु में काफी अच्छा उपज होता है। इसके ऊपर प्रति एकड़ 40 क्विंटल तक हो जाता है। यह गर्मी और वर्षा दोनों ऋतु में अच्छा उत्पादन देती है।

करेले की खेती के लिए जलवायु

करेला की खेती के लिए आधार जलवायु की जरूरत पड़ती है। करेला के पौधों की खासियत यह है कि अन्य कद्दू वर्गीय फसलों की अपेक्षा अधिक शीत सहन करने की क्षमता रखता है। अधिक वर्षा से फसल की उपज घट जाती है इसीलिए आप जलवायु अधिक अनुकूल रहने पर खेती कर सकते हैं। खेती के लिए उत्तर और मध्य भारत की जलवायु काफी ज्यादा उपजाऊ होती है।

करेले की खेती की तैयारी कैसे करें

करेला की खेती की तैयारी करने के लिए सबसे पहले अच्छी भूमि का चयन करना आवश्यक है। जिसका अम्ल और नमक का प्रतिशत सामान्य से अधिक ना हो अर्थात इसका पीएच मान 7 से 8 के मध्य तथा मृदा में जीवाश्म का प्रतिशत अधिक से अधिक होना चाहिए। तब जाकर पौधे को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व उपलब्ध हो सके। और इतना जब हो जाएगा तो फसल का पैदावार काफी अच्छा होता है।

खेती करने से पहले खेत को कम से कम 3 से 4 बार जुताई कर दे। और उसके बाद सारी हुई गोबर का खाद डालकर फिर से एक बार जुताई कर देनी चाहिए जिससे मिट्टी काफी उपजाऊ हो जाती है। और वहां पर खेती करने से काफी फायदा होता है।

करेला का प्रमुख किस्में

कोयंबटूर लॉन्ग:- यह दक्षिण भारत की प्रमुख किस्म है इस पौधे में अधिक फैलाव होता है। जिसके कारण फल अधिक संख्या में लगते हैं। फल का औसत वजन 80 ग्राम होता है इसकी ऊपर प्रति एकड़ 40 क्विंटल तक हो जाती है।

कल्याणपुर बारहमासी:- चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय द्वारा इस किस्म का विकास किया गया है। इस किस में फल आकर्षक एवं गहरे हरे रंग के होते हैं जो देखकर ही काफी अच्छा लगता है। यह कि गर्मी और वर्षा दोनों ऋतु में उगाई जा सकती है। अर्थात किस वर्ष उत्पादन दे सकती है, इसीलिए इसका नाम बीहमासी रखा गया है और इसके ऊपर प्रति एकड़ 70 क्विंटल तक हो सकता है।

फसल की तुड़ाई कैसे और कब करें

करेला फलों की तुरई कोमल अवस्था में करनी चाहिए वैसे सामान्य बी 90 दिन के पहचान फल तोड़ने लायक हो जाता है। फल की तुरई करते समय बहुत ही धैर्य रहकर तोड़ना होगा। और दोनों हाथों का उपयोग करके तोड़ना चाहिए। क्योंकि टहनी टूट जाएगा तो फिर आप उसे पौधे में दोबारा करेला नहीं देख पाएंगे। इसीलिए सप्ताह में 2 से 3 बार करेले की तुड़ाई कर लेनी चाहिए।

करेला खाने से लाभ

करेला में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट फाइबर होता है या खनिज से भरपूर होता है। जिसमें पोटेशियम, जिंक, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, आयरन, कॉपर मैग्नीशियम पाए जाते हैं। इसके साथ आपको प्रचुर मात्रा में विटामिन सी और विटामिन ए मिलेगा जो स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होता है। करेले के रस और सब्जी बनाकर सेवन अनेक बीमारी जैसे पाचन तंत्र की खराबी, भूख की कमी, पेट में दर्द, बुखार, आंखों के रोग में लाभ होता है।

इसीलिए करेले की सब्जी का उपयोग या इसका रस पीना चाहिए। चिडचिडाहट सुजाक बवासीर आदि में भी करेले से फायदा मिलता है। इतना ही नहीं करेले के बीज को घाव, आहार नलीका, तिल्ली विकार, लिवर से संबंधित बीमारियों में उपयोग के लिए जाता है।

करेले की खेत की सिंचाई

करेला की फसल में सिंचाई काफी महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है इसलिए समय-समय पर आवश्यकता अनुसार सिंचाई करते रहना चाहिए। करेला के फसल गर्मी और वर्षा ऋतु दोनों में उगाई जा सकती है। अगर किसी प्रकार की खेत में खरपतवार अधिक संख्या में उग जाते हैं। तो समय-समय पर निकलना होगा जिससे फल-पल अधिक संख्या में हो सके।

करेले की फसल की सुरक्षा कैसे करें

करेले की फसल कीटों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम होता है इसीलिए अधिक स्वस्थ फसल है। तो नियमित अंतराल पर कुदरत किट रक्षक का छिड़काव करते रहना चाहिए ताकि फसल ऊपर ज्यादा और उत्तम गुणवत्ता के साथ प्राप्त हो सके। क्योंकि कोई भी फसल की खेती की जाती है तो कीटाणु और खरपतवार से बचाव सबसे महत्वपूर्ण होता है।

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