Matar Ki Kheti Kaise Kare: मटर की खेती कैसे करें

Matar Ki Kheti Kaise Kare: मटर की खेती विभिन्न प्रकार की मृदाओं में की जा सकती है। फिर भी गंगा के मैदानी भागों की गहरी दोमट मिट्टी में सबसे अच्छा उपज होता है। मटर की भूमि को अच्छी तरह तैयार करना चाहिए। खरीफ की फसल की कटाई के बाद भूमि की जुताई मिट्टी पलटने वाले हाल से 3 से 4 बार अच्छा से कर देनी चाहिए। धान के खेतों में मिट्टी के घेरे को तोड़ने का प्रयास करना चाहिए। अच्छे अंकुरण के लिए मिट्टी में नमी होना जरूरी है। मटर की खेती 12 मास किया जाता है इसीलिए किस को काफी ज्यादा मुनाफा होता है। इसकी खेती करने से, मटर की खेती पूरे भारत में की जाती है।

मटर की खेती विभिन्न प्रकार की मिट्टी में कर सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहरी क्षेत्र में मटर की खेती बड़े पैमाने पर किया जाता है। मगर सबसे अच्छी मटर खेती गंगा की मैदानी भागों पर की जाती है। यहां की मिट्टी दोमटी मिट्टी होती है जहां पर मटर की खेती बहुत ही अच्छा होता है। इसकी खेती करने से पहले खरीफ का फसल जब खटाई हो जाती है तब 3 से 4 बार जुताई कर देनी चाहिए। अच्छे अंकुरण के लिए मिट्टी का नामी होना बहुत जरूरी है। मटर की खेती पूरे भारत में की जाती है और सबसे खास बात है कि 12 मास इसकी खेती किया जा सकता है।

Matar Ki Kheti Kaise Kare

मटर का उपयोग सब्जियों से लेकर तल कर खाने तक बहुत तरह के व्यंजन में उपयोग किया जाता है। और इसका सब्जी काफी पसंदीदा होता है। क्योंकि मटर पनीर का सब्जी जब बन जाए तो लोगों को काफी अच्छा लगता है। स्वादिष्ट और टेस्टी होती है मटर एक दलहनी फसलों की प्रजाति है। इसलिए इसकी खेती किसी भी खेत में की जा सकती है। जब आप मटर की खेती करेंगे तो इसके जड़ों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने की क्षमता होती है। आपको जानकारी के लिए बता दो कि इसकी जद में राइजोबियम नाम की कीटाणु पाए जाते हैं जो नाइट्रोजन को इकट्ठा करते हैं। और फसल को उपजाऊ बनाते हैं इस जीवाणु की पर्याप्त संख्या होने से पौधे में नाइट्रोजन की क्षमता बढ़ जाती है।

Matar Ki Kheti Kaise Kare: मटर की खेती कैसे करें
Matar Ki Kheti Kaise Kare

खरपतवार नियंत्रण

मटर की खेती करते समय आपको खरपतवार को भी ध्यान रखना होगा कि उसे समय-समय पर खेतों से बाहर करें। अगर कोई कीटाणु पड़ता है तो उसके लिए छिड़काव की भी जरुरत पड़ेगा। सबसे पहले चार से पांच लीटर पेडिमिथेलिन 600-800 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर किधर से बोलकर बुवाई के तुरंत बाद छिड़काव कर देना चाहिए। इससे काफी हद तक खरपतवारों को नियंत्रित किया जा सकता है।

मटर की किस्में

मटर की किस्में समय के आधार पर अलग-अलग पाई जाती है। मटर की अगेती किस्में है – अगेता -6, अर्किल, पंत सब्जी मटर3 एवं आजाद पी.3 आदि और माध्यम एवं पिछेती किस्में है आजाद पी.1, बोनविले, जवाहर मटर1, आजाद पी.2 है।

बुवाई के लिए खेत की तैयारी

मटर की खेती करने के लिए सबसे पहले खेत को उपजाऊ बनाना होगा। जिसके लिए तीन से चार बार जुटा देशी हल से करना चाहिए उसके बाद खेत की मिट्टी को भली-भांति समतल कर भुरभुरा बना लेनी चाहिए। आखिरी जुदाई गोबर का खाद डालने के बाद कर दे जिससे खेतों में नमी का दबदबा बना रहा है। और खेत उपजाऊ हो जाए किस खेत में उसके बाद मटर की खेती करेंगे तो काफी अच्छा उपज होगा।

मटर की तुड़ाई

मटर की खेती में फूल आने के 3 सप्ताह बाद फलिया की तुड़ाई के योग्य हो जाता है। उसके बाद आप मटर की तुड़ाई कर सकते हैं। सामान्यतः 7 से 10 दिन के अंतराल पर 3 से 4 तुरई करनी चाहिए मटर की खेती में प्रति एकड़ 20 से 30 क्विंटल। अगर आप अच्छा किस्म के पैदावार का उपयोग करते हैं तो प्रति एकड़ लेकर 40 से 60 क्विंटल तक का उत्पादन हो सकता है।

मटर बुवाई का समय

मटर की बुवाई मध्य अक्टूबर से नवंबर तक की जाती है जो खरीफ की फसल की कटाई की पर निर्भर करता है। अक्टूबर महीने में आप इसकी बुवाई कर सकते हैं। वहीं नवंबर के प्रथम सप्ताह तक खेती पूरी तरह से हो जाना चाहिए और समय पर सिंचाई की भी जरूरत पड़ती है।

मटर की खेती के लिए सिंचाई

मटर की खेती की सिंचाई आवश्यकता अनुसार करनी चाहिए प्रारंभ मिट्टी में नवमी और शीत ऋतु की वर्षा के आधार पर एक से दो सिंचाई की आवश्यकता हो सकती है। पहली सिंचाई फूल आने के समय और दूसरी सिंचाई फलिया बनने के समय करना चाहिए। इस बात का ध्यान रखना चाहिए की हल्की सिंचाई करें और खेतों में पानी ठहरे न।

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